Thursday, January 8, 2015

2015 की शुरुआत!!





2015 की शुरुआत हो गई है और मेरा दिमाग आने वाले कुछ बदलाव को लेकर पहले से ही विचारो से भर चूका है.. वैसे यह 2011-2012 की तरह दुखदायी समय नहीं है पर दिमाग का दही तो बनना शुरू हो चूका है, कुछ बदलाव ठीक 8 महीने बाद होने वाले है, वैसे यह बदलाव कोई दुखद नहीं होंगे, पर एक सामाजिक रूप से चीज़ो में काफी उलटफेर होगा.. अगर कोई यह ब्लॉग पढ़ रहा है तो उसे मैं पहले बता दू कि 8 महीने बाद  मेरी शादी नहीं हो रही है.. :P , कुछ और ही चीज़े है..

पर एक बात मैने गौर की है अच्छा है सामान्यतः जीवन मै आने वाले परिवर्तनों को लेकर हम मनुष्यो को कोई पूर्व जानकारी नहीं होती, होता सब अचानक ही है.. मुझे लगता है कि अगर हमें विशेषतः अप्रिय घटनाओं के घटित होने की तिथि की जानकारी पहले से होने लगे तो जीवन जीने के प्रति हमारा नजरिया काफी उदासीनता से भर जायेगा.. जीवन से रहश्यता की भावना समाप्त हो सकती है.. हम क्यों कुछ नया सृजित करना चाहेंगे जब हमारा मन सिर्फ आने वाले घटनाओं के प्रति ही दुखी रहेगा..

वैसे कुछ दिनों के बाद मैने अपने उमड़ते हुए विचारो को काफी संतुलित कर लिया है, और इसमें मेरे अध्यात्म के प्रति झुकाव का काफी योगदान है, खासकर ओशो के ज्ञान को मैं काफी पढ़ रहा हूँ और यह आने वाले बदलावों के प्रति मुझे काफी हद तक तैयार कर रहा है. ओशो के कारण मै वर्त्तमान में उपस्थित एवं जागरूक हो रहा हूँ.. और तो और ओशो वर्ल्ड पत्रिका के इस माह के टैरो मार्गदर्शन में मेरे राशि में भी यही सन्देश दिया है कि मैं भविष्य में न पड़, वर्तमान में अधिक से अधिक रहने का प्रयास करूँ एवं अपने क्षणों को आनंदपूर्वक जियूं..

एक बात तो है मेरे जीवन में आध्यात्मिकता की उपस्तिथि ने काफी प्रभाव डाला है एवं सबसे मुख्य बात यह है यह आपको जीवन को भरपूर जीना सिखाती है.. बिना किसी पूर्वाग्रह के..

चलो कुछ और बात करें.. अभी हाल में मेरे एक मित्र ने मुझे रोड ट्रिप पर चलने का सुझाव दिया है, जगह राजस्थान होगी.. और मैं सही में चाहता हूँ कि जो अस्थायी समय हमने सोचा है उसी समय में यह ट्रिप हो.. शायद कुछ विचार है मेरे मन में, जो मुझे भटकाने का प्रयास कर रहे है, पर यह मेरा अहम है जो मुझे मेरे "कम्फर्ट जोन" से बाहर निकलने नहीं देना चाहता, पर मैं इन सबसे भ्रमित नहीं हूँगा क्योंकि आख़िरकार मैं अपने लिए ऐसी ज़िन्दगी नहीं चाहता जो दुनियादारी के ठेठ एवं बोझिल प्रतिरूपों से भरी हो, और जिसने ज्यादातर लोगो की ज़िन्दगी को बोझिल बना के रखा है.. मेरी ज़िन्दगी मेरी है, और इसको जीने का सलीका भी मेरा होगा, और सलीका भी ऐसा जो "लोग क्या कहेंगे" से बिलकुल अप्रभावित..

  

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