Wednesday, January 21, 2015

दो "कटिंग" चाय और हमारी अटूट दोस्ती




आज के दिन की शुरुआत बहुत ही प्यारे तरीके से हुई, जब मैं और मेरी सबसे अच्छी दोस्त मिले, वह भी सबेरे 6:30 बजे हबीबगंज रेलवे स्टेशन पर। और फिर संभव हो पाई हमारी अपनी (पर कई महीनों से लंबित) मुलाकात..

बात यह थी कि मेरी दोस्त फिर से अमेरिका जा रही हैं और इस बार लम्बे समय के लिए और उसके पहले हमने मिलने का सोचा था। ज़िन्दगी अब हम दोनों के लिए बदल रही है, पर इसके पहले हमने यह निश्चय किया था कि फिर एक बार मिलेंगे और हमारी 1999 से चली आ रही दोस्ती को "रिफ्रेश" करेंगे।

वैसे कुछ हफ्ते पहले हम मिले तो थे पर उसमे कुछ कमी रह गयी थी और इस बार दो दिन पहले उसी ने मुझे सुझाव दिया कि वह फिर से भोपाल आ रही है और इस बार हम लोग सबेरे-सबेरे रेलवे स्टेशन पर ही मिलेंगे और किसी भी टपरी (गुमटी) में चाय पिएंगे और वह भी भारतीयों की लोकप्रिय "कटिंग" चाय।

उसकी ट्रैन सबेरे 5:30 बजे आने वाली थी.. वैसे तो मैं जल्दी उठने का आदि हूँ पर इस जनवरी की ठण्ड में इतनी जल्दी रज़ाई छोड़ना बड़ा ही मुश्किल काम है और तो और मैं पहली बार ट्रैन लेट होने की प्रार्थना भी कर रहा था... और शायद वह कबूल भी हो गई, जब उसकी ट्रैन एक घंटा लेट से आई।

पर इन सबके बाद, मैं उससे स्टेशन पर मिला और हम थोड़ा बहुत इधर ऊधर घूमने के बाद हमारी खोज़  खत्म हुई सात नंबर बस स्टॉप पर जहाँ हम आराम से बैठे, खूब सारी बातें- गपशप की और साथ में हुए दो दौर "कटिंग" चाय के..

फिर हम बढें बड़े तालाब के लेक व्यू की ओर.. याद रहें यह सब सबेरे 6:30 से 9:00 के बीच की बात है.. दैवयोग से आज सुबह ठण्ड भी कम, सड़को में सबेरे ट्रैफिक भी कम रहता ही है.. सब मिलाकर बढ़िया माहौल था.. लेक व्यू तो अपने आप में है ही भोपाल की सबसे उत्तम जगह, जहाँ जो भी जाता है उसका मन प्रसन्न होना स्वाभिक ही हैं।
तो कुछ समय यहाँ चहल कदमी करने के बाद.. मैने उसे उसके घर पर छोड़ा और यहीं खत्म हुई हमारी मस्त मुलाकात...


हमारी दोस्ती स्कूल के अंतिम कक्षाओं से शुरू हुई थी.. तब हमने तो नहीं सोचा था कि वह दोस्ती में, आज लगभग 16 सालों के बाद भी, इतनी रौनक और ताज़गी रहेगी.. कुछ उतार-चढ़ाव जरूर आएं पर एक दोस्ती का बंधन हमेशा अटूट रहा हमारे बीच.. मिलने मिलाने का सिलसिला थोड़ा कम भी हुआ है पर मद्देनज़र यहाँ यह बात है कि हमें मालूम है कि हम एक दूसरे के परम मित्र हमेशा बने रहेंगे और जैसा एक हिंदी फिल्म के गाने की पंक्ति है वैसा ही हमारा मानना भी है - "तू है तो I'll be alright!"

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