Wednesday, January 1, 2020

कॉफ़ी के साथ दोस्ती की कुछ बात



कॉफ़ी के प्यालो के साथ दो लोग बैठकर बतिया रहे थे। इन दोनों की पहली मुलाकात तो सहकर्मियों के रूप में हुई थी, पर वह रिश्ता दोस्ती के रूप में बदल गया था। इनमे से पहले इंसान, जिसे आप प्रशांत बुला सकते हो, के मन के किसी कोने में यह बात उठ रही थी कि दोस्ती के रिश्ते की खास बात ही यह है कि एक तो उसे आप खुद चुनते हो और दूसरी, कि उसमे उम्र आदि का कोई बंधन नहीं होता है। कौन कब आपका दोस्त बन जाये, यही बात इस रिश्ते को और खूबसूरत बनाता है।

प्रशांत ने जब पहली बार जयपुर में काम करना शुरू किया था, उसके पहले तक उसे लगता था कि वह स्कूल या कॉलेज में दोस्त बनाने वाले दौर को कब का पार कर चुका है और अब शायद ही नए लोगो से वह रिश्ता बन पाए। पर उसे कहाँ पता था कि चीज़े तब और अच्छे से होती है जब आप उसे अपने संकीर्ण नजरिये से देखने की कोशिश न करें।

और जयपुर में ही नए लोगो के उम्र और विचारो की विभिन्नताओं और विशेषताओं ने प्रशांत को खुद कितने नए  मजेदार अनुभवों से मिलवाया है।

"कहाँ खो गए?"  प्रशांत के दोस्त के इन शब्दों ने विचारो में डूबे प्रशांत को एकाएक चौंका सा दिया।

"कुछ नहीं, बस ऐसे ही कुछ सोच रहा था!" मुस्कुराते हुए प्रशांत ने जवाब दिया और दोनों फिर से कॉफ़ी के प्यालो के साथ बतियाने में लग गए।

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